धाराओं की उत्पत्ति का कारण

सागर का जल सदा गतिशील रहता है। सन्मार्गी पवनों का प्रवाह, जल के ताप और घनत्व में अन्तर, वर्षा की मात्रा और पृथ्वी गतिशीलता आदि कारक धाराओं को जन्म देने में सहायक होते हैं।

स्थायी पवनें - स्थायी पवनें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से धाराओं को जन्म देती हैं, क्योंकि विश्व की अधिकांश धाराएँ, प्रचलित पवनों का ही अनुगमन करती हैं। हिन्द महासागर में चलने वाली धाराएँ प्रति 6 महीने पश्चात् मानसून की दिशा परिवर्तन के साथ ही अपनी दिशा बदल लेती हैं। उष्ण कटिबन्ध में सन्मार्गों पवने महासागर में पश्चिम की ओर चलने वाली धाराएँ उत्पन्न कर देती हैं। शीतोष्ण कटिबन्ध में पछुआ पवनें पश्चिम से पूरब की ओर धाराएँ प्रवाहित करती हैं।

तापमान में भिन्नता - उष्ण सागरों में जल का घनत्व तापमान ऊँचा रहने पर घट जाता है तथा जल हल्का होकर फैलता है, जबकि तापमान गिरने से जल का घनत्व अधिक हो जाता है तथा जाता है। परिणामस्वरूप गरम जल धारा के रूप में ठण्डे प्रदेशों की ओर प्रवाहित होने लगता है। इसके विपरीत, ठंडे भागों का जल गरम भागों की ओर बहता है। उत्तरी ध्रुव प्रदेशों से लैब्राडोर तथा क्यूराइल की धाराएँ दक्षिण की ओर जबकि गल्फस्ट्रीम तथा क्युरोसिवो गरम जल धाराएं उत्तरी ठण्डे भागों की ओर चलती हैं।

जल का खारापन - खारेपन की मात्रा कहीं अधिक और कहीं कम होती है। अधिक खारे जल का घनत्व भी अधिक हो जाता है, जबकि कम खारेपन से उसका घनत्व कम रहता है। अधिक घनत्व वाला जल नीचे बैठ जाता है। फलस्वरूप अपने घनत्व को समान रखने के लिए कम घनत्व के स्थानों से जल अधिक घनत्व वाले स्थानों की ओर बहता है जिससे धाराओं की उत्पत्ति होती है।

पृथ्वी की परिभ्रमण गति - सागरों में धाराओं का प्रवाह प्रायः गोलाकार देखा जाता है। धाराओं की यह प्रकृति पृथ्वी के परिभ्रमण से सम्बन्धित है। फेरेल के नियमानुसार, धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं। इसी कारण धाराओं का प्रवाह घीरे-घीरे गोलाकार बन जाता है।

प्रशांत महासागर की धाराएँ

लनिनो अथवा विपरीत विषुवतधारा

  • El Niño एक गर्म जलधारा है.
  • यह दक्षिणी विषुवतरेखीय धारा से निकलकर पेरू के तट के समानांतर उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती रहती है.
  • इस धारा के दक्षिण की ओर जाने से पेरू के तट और आसपास के जल का तापमान बढ़ जाता है जिससे मछलियों की उत्पत्ति में कठिनाई होती और अनेक बीमारियाँ फैलती हैं.

पूर्वी ऑस्ट्रेलिया की धारा

  • न्यूगिनी द्वीप (New Guinea Island) के निकट दक्षिणी विषुवतरेखीय धारा दो शाखाओं में बंट जाती है.
  • इसकी दक्षिणी शाखा पूर्वी ऑस्ट्रेलिया तट के साथ-साथ बहती है इसलिए इसे पूर्वी ऑस्ट्रेलिया की गर्म धारा कहते हैं.

क्यूरोशियो की धारा

  • यह धारा आंध्र महासागर की गल्फस्ट्रीम धारा (Gulfstream Current) के जैसी है. उत्तरी विषुवतरेखीय धारा फिलिपिन्स द्वीप (Philippines Islands) के नजदीक व्यापारिक पवनों के प्रभाव से उत्तर की ओर मुड़ जाती है.
  • उसके बाद मध्य चीन के सहारे बढ़ते हुई यह जापान के पूर्वी तट पर पहुँचती है.
  • इस धारा का रंग गहरा नीला होने के कारण जापानी लोग इसे “जापान की काली धारा (Black Stream of Japan)” कहते हैं.
  • जापान तट के सहारे बहती हुई यह धारा क्यूराइल की ठंडी धारा से मिल जाती है.
  • यहाँ पर पछुआ हवाओं के प्रभाव में आने से पहले ही मुड़कर आगे उत्तरी प्रशांत प्रवाह (North Pacific Drift) कहलाती है.
  • वैंकुवर द्वीप (Vancouver Island) के समीप यह धारा दो शाखाओं में बँट जाती है.
  • एक शाखा उत्तर की ओर अलास्का तट के सहारे-सहारे बहती हुई पुनः उत्तरी प्रशांत प्रवाह में मिल जाती है. इसे अलास्का की धारा कहते हैं.

उत्तरी विषुवतरेखीय धारा

  • यह एक गर्म धारा है.
  • यह धारा उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक पवनों के चलते मध्य अमेरिका के तट से होते हुए पश्चिम में फिलिपिन्स द्वीप की ओर चली जाती है.
  • यहाँ (फिलिपिन्स द्वीप) इस धारा की दो शाखाएँ (branches) हो जाती हैं.
  • प्रथम शाखा दक्षिण की ओर मुड़कर अपनी दिशा पूर्व को कर लेती है जिसे प्रति विषुवतरेखीय धारा कहते हैं.
  • दूसरी शाखा उत्तर की ओर फार्मूसा द्वीप (Formosa Island) तक पहुँच जाती है जो आगे जाकर क्यूरोशियो (Kuroshio Current) के नाम से सुप्रसिद्ध है.

क्यूराइल की धारा

  • यह एक ठंडी जलधारा है.
  • बेरिंग जलडमरूमध्य (Bering Strait) से दक्षिण साइबेरिया तट के साथ बहती क्यूराइल द्वीपसमूह के निकट क्यूरोशियो के धारा से मिलने वाली इस ठंडी धारा को क्यूराइल या ओयाशिवो को धारा कहते हैं.

दक्षिण विषुवतरेखीय धारा

* दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के पश्चिमी भाग में लगभग 3°-10° दक्षिणी अक्षांश पर यह धारा पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है.
*पश्चिम दिशा में चलती हुई ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित न्यूगिनी तट से टकराकर दो भागों में विभाजित हो जाती है.
  • प्रथम शाखा उत्तर की और चलकर प्रति विषुवतरेखीय धारा से मिल जाती है और अपनी दिशा को पूर्व की ओर कर लेती है.

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