संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है मौलिक अधिकार नागरिकों को व्यक्ति तथा राज्य दोनों के विरुद्ध प्राप्त होते हैं मौलिक अधिकार अमेरिका से लिए गए हैं मौलिक अधिकारों को संविधान की आधारशिला तथा मैग्नाकार्टा कहा जाता है

* 1935 में सर्वप्रथम मौलिक अधिकारों की मांग पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी

✓ अनुच्छेद 20 तथा 21 को छोड़कर आपातकाल के दौरान प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता

✓ केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकार 15 16 19 29 और 30 कुल 5 है प्रारंभ में नागरिकों को 7 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए थे परंतु 44 वें संविधान संशोधन 1978 से संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार की श्रेणी से हटाकर अनुच्छेद 300(क) के अंतर्गत कानूनी अधिकार बना दिया गया

1 समानता का अधिकार – अनुच्छेद 14 से 18

2 स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19 से 22

3 शासन के विरुद्ध अधिकार अनुच्छेद 23 से 24

4 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28

5 संस्कृति तथा शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 29 व 30

6 संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद 32

समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18)

√ अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष समता तथा विधि का सम्मान संरक्षण

√ अनुच्छेद 15 – धर्म जाति लिंग वंश तथा जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का अभाव

√ अनुच्छेद 16 – लोक नियोजन में अवसर की समानता

√ अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता की समाप्ति

√ अनुच्छेद 18 उपाधियों का निषेध

स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22)

√ अनुच्छेद 19 – प्रारंभ में नागरिकों को सात स्वतंत्रता प्रदान की गई थी परंतु 44 वें संविधान संशोधन से संपत्ति की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया गया तथा वर्तमान में भारतीय नागरिकों के पास कुल 6 स्वतंत्रता है

1 विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

2 शांतिपूर्वक बिना हथियारों के सम्मेलन की स्वतंत्रता

3 समुह संघ व समिति बनाने की स्वतंत्रता

4 भ्रमण की स्वतंत्रता

5 निवास के स्वतंत्रता

6 रोजगार की स्वतंत्रता

√ अनुच्छेद 19 (क) 1 प्रेस की स्वतंत्रता

2 सूचना का अधिकार

√ अनुच्छेद 20 – अपराधों की दोष सिद्धि के संबंध में

√ अनुच्छेद 21 प्राण व दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण – विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन के स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता हैं

® डॉ भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 21 को सविधान का मेरुदंड कहा है

86 वें संविधान संशोधन द्वारा शिक्षा के अधिकार को 21(क) में सम्मिलित किया गया

√ अनुच्छेद 22 – गिरफ्तारी यों से संरक्षण

शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 व 24)

√ अनुच्छेद 23 मानव का दुर्व्यवहार तथा बल आश्रम पर प्रतिबंध

√ अनुच्छेद 24 बाल श्रम की समाप्ति

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (25 से 28)

√ अनुच्छेद 25 – अंतःकरण की स्वतंत्रता किसी भी धर्म को मानने व आचरण करने तथा प्रचार करने की स्वतंत्रता

√ अनुच्छेद 26 – धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता

√ अनुच्छेद 27 – करो को देने की छूट

√ अनुच्छेद 28 – राजकिय शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा पर प्रतिबंध

संस्कृति तथा शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 29 और 30)

√ अनुच्छेद 29-अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा लिपि तथा संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार √ अनुच्छेद 30- शिक्षण संस्थाओं की स्थापना तथा प्रशासन का अधिकार

संवैधानिक उपचारों का अधिकार – अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के संरक्षण का प्रावधान अपने आप में एक मौलिक अधिकार है

® डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा ह्रदय तथा दीवार कहा है ®मौलिक अधिकारों के हनन की स्थिति में नागरिक उत्तम न्यायालय में अनुच्छेद 32 तथा उच्च न्यायालय में अनुच्छेद 226 दोनों न्यायालय की शरण प्राप्त कर सकता है तथा न्यायालय द्वारा निम्न रिट जारी की जाती है

1 बंदी प्रत्यक्षीकरण – बंदी प्रत्यक्षीकरण किसी भी अपराधी को न्यायालय के समक्ष उपस्थित करने के लिए जारी किया जाता है

2 परमादेश न्यायलय द्वारा किसी भी सार्वजनिक पदाधिकारी को उसके पद से जुड़े हुए कार्यों को करने का आदेश दिया जाता है

3 प्रतिषेध – उत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय द्वारा नीचे के न्यायालयों से किसी भी विषय पर विचार विमर्श करने से रोक दिया जाता

4 उत्प्रेषण – रुस्तम तथा उच्च न्यायालय द्वारा नीचे के न्यायालयों से किसी भी विषय को अपने पास मंगवा लिया जाता है

5 अधिकार पृच्छा – यदि किसी व्यक्ति द्वारा गैर गैर संवैधानिक तरीके से पद को धारण किया जाता है तो न्यायालय द्वारा उसका आधार पूछा जाता है

नोट :- मौलिक अधिकारों से संशोधन का अधिकार संसद के पास प्रतिबंध लगाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास था तब परिवर्तित कराने का अधिकार उत्तम हो तथा उच्च न्यायालय के पास है

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